है वह सच्चा इन्सान, जो किसी के काम आता है।
है वह सच्चा इन्सान,
जो किसी के काम आता है।
दुःखी होता दुःखी को
देख आँसू बहाता है।
विषय और वासना में ही,
समय अपना गँवाये जो।
कमाये पाप से दौलत,
बुराईयों में लुटाये जो।
वह नर इंसानियत के नाम पर,
धब्बा लगाता है।।
है वह सच्चा इन्सान जो किसी……
हजारों आदमी बिन औषधि,
बिन अन्न मरते हैं।
न तन पर उनके हैं वस्त्र,
न बच्चे उनके पढ़ते हैं।
है वह धनवान सच्चा जो,
दुःखी के दुःख मिटाता है।।
है वह सच्चा इन्सान जो किसी……
न भाई-बन्धु और बेटे,
न पत्नी साथ जायेगी।
कमाई पाप की हरगिज,
न तेरे काम आयेगी।
धर्म है एक साथी अन्त में,
जो काम आता है।।
है वह सच्चा इन्सान जो किसी……
धर्म की राह में, तन,
मन व धन अपना लुटाये जो।
ऋषिवर की तरह संसार-भर में
नाम पाये जो।
उसका नाम फिर इतिहास
के पन्नों में आता है।।
है वह सच्चा इन्सान जो किसी ……
तेरी बातों से ही ‘नन्दलाल’
बेड़ा न पार होगा।
केवल गीतों के लिखने से,
तेरा उद्धार न होगा।
वह होगा पार-तन,
मन धन धर्म पर जो लुटाता है।।
है वह सच्चा इन्सान जो किसी……










