हैं सब से दिव्य वो पल जिनमें।

0
46

हैं सब से दिव्य वो पल जिनमें।

हैं सब से दिव्य वो पल जिनमें।
हम ब्रह्म निकटतम पाते हैं।
संसार शून्य हो जाता है।
हम भी तो अमिट हो जाते हैं।। टेक ।।

मानवता के मन में दीप जला।
जग रौशन करना काम भला।
इस जग में सुख हम बांटते हैं।
इस जग से सुख हम पाते हैं ।। १।।

जो सूत्र जगत का जानता है।
वो ब्रह्म यहीं पहचानता है।
ब्रह्ममय हो गए मानव जो।
वे जग में ही मोक्ष पा जाते हैं।।२।।