है न्याय ईश्वर जो भी करे

0
25

है न्याय ईश्वर जो भी करे

है न्याय ईश्वर जो भी करे,
वह सब कुछ अच्छा होता हैं।

जो समय हाथ से निकल गया,
उसे करके याद क्यों रोता है।।

कारण के बिना कार्य की,
उत्पत्ति कभी नहीं होती है।

कारण करता के हाथों में,
काटेगा जैसा बोता है।।1।।

निदान देख करके जैसे,
रोगों की चिकित्सा करते हैं।
है सफल चिकित्सक वही
सदा जो रोग का कारण खोता है। ।2।।

धर्म अधर्म कर्म फल ही,
सुख दुख में परिणत होते हैं।
है पापों का परिणाम दुख
सुख का पुण्य से समझौता है।।3।।

ज्ञान पूर्वक कर्म से ही,
जीवन के तीनों ताप करें।
अज्ञान अविद्या अंधेरे में
प्रेमी क्यों पड़ा हुआ सोता है।।4।।