हैं निर्भाग वें कितने जिनको
तर्ज – पण्डित जी मेरे मरने के……
हैं निर्भाग वें कितने जिनको,
ना पिता का प्यार मिला।
ना माँ की ममता मिल पायी,
ना वो लाड़ दुलार मिला।।
जिन बच्चों के सर पर साया,
मात-पिता का ना होता-2
उन बच्चों से सचिन ‘सारंग’,
अपने दिल के तार मिला हैं
निर्भाग वें कितने……..
ओरो के साये में पलकर,
जीवन बशर किया अपना-2
ना कभी खुशहाली देखी,
ना कोई अधिकार मिला हैं
निर्भाग वें कितने……
रूखी-सूखी रोटी खाके,
रो-रो के वक्त पास किया-2
ना कभी कोई प्रेम से बोला,
इक झूठा संसार मिला हैं
निर्भाग वें कितने……
छुप-छुप कर वो खाते होंगे,
ड़र ड़र कर सोते होंगे-2
जिनको बचपन से बेगाना,
रहने को घरबार मिला हैं
निर्भाग वें कितने……..










