ज्ञान स्वरूप हे परमेश्वर !

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ज्ञान स्वरूप हे परमेश्वर !

ज्ञान स्वरूप हे परमेश्वर !
हिंसा रहित कर दो
मन वचन कर्म से हिंसा के
दोषों को दूर कर दो

सृष्टि-यज्ञों में व्यापक हो तुम
ऋत-सत्य नियमों को ढ़ालते तुम
कैसे सफल हो सकता है
तेरे बिना प्यारे याज्ञिक भगवन् !
हिंसा-कुटिलता से रहित
अध्वर-यज्ञ वर दो
मन वचन कर्म से हिंसा के
दोषों को दूर कर दो

यज्ञ संचालन में स्वार्थ ना हो
यज्ञ में हिंसा के भाव ना हों
यज्ञ-समय ना भूलें तुम्हें
भूले से भी यज्ञ हिंसक ना हो
अध्वर यज्ञ की प्रेरणा दो
स्वीकृत जो देवों को हो
मन वचन कर्म से हिंसा के
दोषों को दूर कर दो

अन्तरात्मा को तुम करो उज्जवल
वैदिक सत्य की प्रज्ञा जागे
सब ओर से तुम घेर लो
अध्वर यज्ञ हो सबसे आगे
हिंसा कुटिलता ना मन में जगे
यज्ञ फलदायक कर दो
मन वचन कर्म हिंसा के
दोषों को दूर कर दो

ज्ञान स्वरूप दिव्य प्रभु
तेरी देखरेख में होवें निर्दोष
प्रेम भावों का हो संगठन
पुरुषार्थ-बल दे दो हे आशुतोष !
फिर क्यों ना होंगे हम सफल
कृपा जब तुम कर दो
मन वचन कर्म हिंसा के
दोषों को दूर कर दो
ज्ञान स्वरूप हे परमेश्वर !
हिंसा रहित कर दो
मन वचन कर्म से हिंसा के
दोषों को दूर कर दो