ज्ञान साधन है शिक्षित ज्ञानी का

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ज्ञान साधन है शिक्षित ज्ञानी का

ज्ञान साधन है शिक्षित ज्ञानी का
अज्ञानी पे करते हैं छाया
रुख़ उनको बदलना आता है
सोम-लहरों से है उनका नाता
ज्ञान साधन है शिक्षित ज्ञानी का

विद्वान् बादल है, जल है प्रजा
जहाँ चाहा – जल बरसा दिया
जाति भीरू या शोषित हो
उन्नत कर उनको वीर किया
है लक्ष्य बड़ा
ज्ञान साधन है शिक्षित ज्ञानी का
अज्ञानी पे करते हैं छाया

विद्वानों के लक्ष्य में है श्रद्धा
शोभित विचारों की प्रज्ञा
जनता में श्रद्धा जगाते हैं
दीवाना उनकी बनती प्रजा
है लक्ष्य बड़ा
ज्ञान साधन है शिक्षित ज्ञानी का
अज्ञानी पे करते हैं छाया

युद्धों में ज्ञानी जगाते हैं
और विजय को भी वो दिलाते हैं
गोला-बारूद का होता अन्त
और सुख शान्ति पाती है प्रजा
है लक्ष्य बड़ा
ज्ञान साधन है शिक्षित ज्ञानी का
अज्ञानी पे करते हैं छाया

संजीवन सोम ही शक्ति है
संदेह से शक्ति बिखरती है
जो ईश-प्रेरणा पे चलता है
उसकी श्रद्धा का सोम जगा
है लक्ष्य बड़ा
ज्ञान साधन है शिक्षित ज्ञानी का
अज्ञानी पे करते हैं छाया

ज्ञानी प्रभु-भक्त ‘विपश्चित’ है
वह सोम-ओ३म् से रक्षित है
उन्हें कौन भला ना चाहेगा
मृतप्राय जनों में भी भरता सुधा
है लक्ष्य बड़ा
ज्ञान साधन है शिक्षित ज्ञानी का
अज्ञानी पे करते हैं छाया
रुख़ उनको बदलना आता है
सोम-लहरों से है उनका नाता
ज्ञान साधन है शिक्षित ज्ञानी का
अज्ञानी पे करते हैं छाया