ज्ञान की जोत मन में जगा दो प्रभो।
ज्ञान की जोत मन में
जगा दो प्रभो।
राह भटके हुओं को
दिखा दो प्रभो।
क्या करें कुछ समझ में
नहीं आ रहा।
बात बिगड़ी हुई है
बना दो प्रभो ।
ज्ञान की जोत मन में
जगा दो प्रभो……
हम सभी लोग आपस में
मिल कर रहें।
प्रेम गंगा हृदय में बहा दो प्रभो।١
ज्ञान की जोत मन में
जगा दो प्रभो……
“सब के अन्तःकरण
जगमगाने लगें।
बस अविद्या का परदा
हटा दो प्रभो।
ज्ञान की जोत मन में
जगा दो प्रभो!”…….
फिर किसी और उलझन
में उलझें न हम।
मन की उलझन से दामन
छुड़ा दो प्रभो।
ज्ञान की जोत मन में
जगा दो प्रभो……
प्यास मन की बुझे
एक ही घूँट से।
अपनी भक्ति का अमृत
पिला दो प्रभो।
ज्ञान की जोत मन में
जगा दो प्रभ…….
आ गए हैं ‘पथिक’
दर पे आशा लिए।
अपने चरणों में हमको
बिठा दो प्रभो।
ज्ञान की जोत मन में
जगा दो प्रभो……..










