गुण गाएँ गुण गाएँ ज्ञानी विद्वान् ॥ इक ओ३म्…

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इक ओ३म् नाम जो ध्याये तर जाए,

पहुँचाए मोक्ष धाम ॥ इक ओ३म्…

थीः पृथ्वी आकाश के स्वामी

पूर्ण पुरुष तुम हो परिज्ञानी

परिपूत कहलाए (2)

गुण गाएँ गुण गाएँ ज्ञानी विद्वान् ॥ इक ओ३म्…

शाशक तू प्रभु है प्रज्ञानी

सब जीवों का अन्तर्यामी

फल कर्मों का दिलाए (2)

गुण गाएँ गुण गाएँ ज्ञानी विद्वान् ॥ इक ओ३म्…

शाशक तू प्रभु है प्रज्ञानी

सब जीवों का अन्तर्यामी

फल कर्मों का दिलाए (2)

दिखाए, दिखाए (2) कर्मों का परिणाम ॥ इक ओ३म्…

अग्रगामी तू हम अनुगामी

आत्मज्ञान दाता ब्रह्मज्ञानी

वेद का ज्ञान कराए (2)

बन जाए बन जाए (2) मानव निष्काम ॥ इक ओ३म्….

तूने इतने भक्त हैं तारे

जितने ना होंगे नभ में तारे

भक्तरतन धन पाएँ

धन पाएँ धन पाएँ (2) बन जाएँ धनवान ॥ इक ओ३म्….

हृदयासन बैठो प्रभु प्यारे

शरण तुम्हारी हम भी तुम्हारे

प्रीत के दीप जलाए (2)

बन जाएँ बन जाएँ अग्नि समान ॥ इक ओ३म्…

(परिज्ञानी) सूक्ष्म हानी (परिपूत) परम विशुद्ध (प्रज्ञान) बुद्धिमान

तर्ज : प्रभु तेरो नाम जो व्यावे फल पाए