घायल है मनवा, मैं किस-किस से बोलूँ ?

0
26

घायल है मनवा, मैं किस-किस से बोलूँ ?

घायल है मनवा
मैं किस-किस से बोलूँ ?
किसकी शरण जा के
पापों को धो लूँ ?
घायल है मनवा

दुर्गुण-दुर्व्यसन,
पाप हटा दो
निर्मल सा मुझको
निष्कलंक बना दो
तेरे प्रेम मोती अमोल पिरो लूँ
घायल है मनवा
मैं किस-किस से बोलूँ ?
घायल है मनवा

मन की व्यथा मैं तुम्हीं को बताऊँ
तेरे द्वार पर ही अलख मैं जगाऊँ
तेरी गोद में जागूँ
चाहूँ तो सो लूँ
घायल है मनवा
मैं किस-किस से बोलूँ ?
घायल है मनवा

सुने कानों के बिन
नैनों बिन दया दृष्टि
वरद दृष्टि से ही चले सारी सृष्टि
तुझे पा के तेरी ही मस्ती में डोलूँ
घायल है मनवा

रक्षा करो मेरी प्यारे वरुण तुम
पुकारूँ तुझे ही मेरी प्रार्थना सुन
तेरे प्रेम को ना कभी जग से तोलूँ
घायल है मनवा
मैं किस-किस से बोलूँ ?
घायल है मनवा

पाया तेरा दर तो अनुभव हुआ है
आशा-उमंगो का वैभव मिला है
किसी भी दशा में ना मुख तुझसे मोड़ूँ
घायल है मनवा
मैं किस-किस से बोलूँ ?


घायल है मनवा
मैं किस-किस से बोलूँ ?
किसकी शरण जा के
पापों को धो लूँ ?
घायल है मनवा