गायेजा, गायेजा भगवान की महिमा गाये जा।

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गायेजा, गायेजा भगवान की महिमा गाये जा।

गायेजा, गायेजा,
भागवान की महिमा गाये जा।

सुबह शाम इस मन मंदिर में
झाडू रोज लगाये जा।।

तरह-तरह के खेल हैं
इसमें दुनियां एक तमाशा है।
कहीं खुशी और कहीं गमी
कहीं आशा कहीं निराशा है।

कभी वो रुलाये तुझे
कभी वो हंसाये,
पर अपना फर्ज
निभाये जा ।।१।।

चिन्ता चिता जगत में
दोनों एक समान कहाती है।
एक जिन्दा को एक
मुर्दा को दोनों सदा जलाती है।।

दुःख जो दिखाये,
वही दुखड़ा मिटाये,
तू चिन्ता दूर हटाये जा।।२।।

रहता कौन हमेशा जग में
किसका यहां ठिकाना है।
बांधले बिस्तर प्यारे अपना
यह तो देश बेगाना है।।

दुनियां सराय कोई आय कोई जाय
सबको ‘पथिक’ समझाये जा ।।३।।

आईना, मुँह पर ही कहता है
साफ-साफ सच यह है
जो साफ होता है सफा कहता है।