गाये प्रभु नाम, बैठ सत्संग में रंग

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गाये प्रभु नाम, बैठ सत्संग में रंग

गाये प्रभु नाम,
बैठ सत्संग में रंग
प्रभु रंग में प्रेम की उमंग में,
गाये प्रभु नाम,
बह रही जो प्रेम की नहायें
उस गंग में रंग प्रभु रंग में,
प्रेम की उमंग में।।
गाये प्रभु नाम ………

दुनियां के झंझटों से मन को
हटा प्रभु चरणों में चित्त को लगा,
जीवन बितायें साधुओं के संग में।।
गाये प्रभु नाम……..

सच और झूठ का भेद
जान ले बुरा क्या है
भला क्या है पहचान ले,
जीवन विताये सुन्दर से ढंग में।।
गाये प्रभु नाम………

प्रभु नाम गान करे,
नित्य प्रति हम तभी
भवसागर से तर जाये
हम संतों ने यही कहा
प्रेम के उमंग में।।
गाये प्रभु नाम……..

जिसके हाथ में
क्षमारुपी शस्त्र है
उसका दुर्जन क्या
बिगाड़ सकते हैं।
घासहीन धरती पर पड़ी
अग्नि स्वयमेव शान्त हो जाती है।