गाए जा गाए जा, भगवान की महिमा गाए जा।

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गाए जा गाए जा, भगवान की महिमा गाए जा।

गाए जा गाए जा,
भगवान की महिमा गाए जा।
सुबह शाम इस मन मन्दिर में,
झाडू रोज लगाए जा।

तरह-तरह के खेल हैं इसमें,
दुनिया एक तमाशा है।
कहीं खुशी और कहीं गमी है,
आशा कहीं निराशा है।

चाहे यह हँसाए तुझे,चाहे यह रुलाए,
बस अपना फर्ज निभाए जा
गाए जा, गाए जा, भगवान को……

चिन्ता और चिता इस जग में,
एक समान कहाती है।
इक जिन्दा को, इक मुर्दे को,
दोनों सदा जलाती है।

दुःख जो दिखाये,
वो ही दुःखड़े मिटाये,
तू चिन्ता दूर हटाए जा।
गाए जा, गाए जा, भगवान की…….

कौन हमेशा रहा जगत में,
किस का यहाँ ठिकाना है।
बाँध ले अपना बिस्तर बाबा,
यह तो देश बेगाना है।
दुनिया सराय, कोई आए कोई जाए।
यह सब को ‘पथिक’, समझाए जा।
गाए जा, गाए जा, भगवान की ………