गाये जा – गाये जा, भगवान् के गुण गाये जा

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गाये जा – गाये जा, भगवान् के गुण गाये जा

गाये जा – गाये जा
भगवान् के गुण गाये जा

सुबह – शाम इस मन मन्दिर में
झाड़ू रोज लगाये जा
गाये जा – गाये जा
भगवान् के गुण गाये जा

तरह तरह के खेल हैं इसमें
दुनिया एक तमाशा है
कहीं पे गम है कहीं खुशी है
आशा कहीं निराशा है
दाता सुख दु:ख कुछ भी दे तू
अपना फर्ज निभाये जा
गाये जा – गाये जा
भगवान् के गुण गाये जा

चिन्ता और चिता इस जग में
दोनों एक कहाती है
एक जिन्दे को, एक मुर्दे को
दोनों सहज जलाती है
मालिक पर विश्वास अडिग रख
चिन्ता दूर भगाये जा
गाये जा – गाये जा
भगवान् के गुण गाये जा

कौन हमेशा रहा जगत् में
किसका यहाँ ठिकाना है
बाँध ले अपने बिस्तर बन्दे
यह तो देश बेगाना है
है यह जगत् मुसाफिर खाना
“पथिक” यही समझाये जा
गाये जा – गाये जा
भगवान् के गुण गाये जा

गाये जा – गाये जा
भगवान् के गुण गाये जा

सुबह शाम इस मन मन्दिर में
झाड़ू रोज लगाये जा
गाये जा – गाये जा
भगवान् के गुण गाये जा