गए दोनों जहां नजर से गुजर

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गए दोनों जहां नजर से गुजर

गए दोनों जहां नजर से गुजर,
तेरी शान का कोई बशर न मिला।
तेरी हर जगह देखी निराली फबन,
तेरा भेद किसी को मगर न मिला ।।

तेरी चर्चा जहाँ की जबानों पर है,
तेरा शोर जमाने के कानों में है।
मगर आँखों से देखा तू पर्दानशी,
कहीं तू न मिला तेरा घर न मिला।।

कोई मिलने का तेरा निशान भी है,
कोई रहने का तेरे मकान भी हैं।
तुझे ढूंढा इधर तू इधर न मिला,
तुझे ढूंढा उधर तू उधर न मिला ।।

कहीं दस्ते सवाल दराज नहीं,
किसी और पे यूँ मुझे नाज नहीं।
कोई तुझ सा गरीब नवाज नहीं,
तेरे दर के सिवा कोई दर न मिला ।।

जो प्रभु का दास है, वह क्यों उदास हो? -आचार्य चन्द्रशेखर