गति जीव आत्मा का कोइ समझाए ।

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गति जीव आत्मा का कोइ समझाए ।

गति जीव आत्मा का कोइ समझाए ।
कहां से तू आए कहां लौट जाए ।।

अन्तरा – कभी इसका आना जाना,
किसी ने न जाना ।
कहां का निवासी है ये,
कहाँ है ठिकाना ।।
किसी को भी कोई अपना,
पता न बताए ।। कहाँ से वो…।।

मिली एक नगरी इसको, अयोध्या निराली ।
नौ आठों चक्रों वाली नौ द्वार वाली ।।
सिर्फ चार दिन ही जिसका,
बादशाहा कहाए ।। कहाँ से वो…।।

“पथिक” ये प्रभु की माया, प्रभु जानता है ।
प्रभु के सिवा न कोई, पहचानता है ।।
ये महान शक्ति सारे, विश्व को चलाए ।।
कहाँ से वो…।।