गैर तो अपने क्या होने थे
गैर तो अपने क्या होने थे
अपने भी नहीं अपने हैं।
इसीलिए भारत माता के
आज अधूरे सपने हैं। टेक।
मोहम्मद बिन कासिम को
अरब से बुलाने वाले गैर न थे।
सिन्ध के राजा दाहिर राय को
मिटाने वाले गैर न थे।।
दाहिर की दो कन्या अरब
पहुँचाने वाले गैर न थे।
अरब खरब धन राशि रिपु को
बताने वाले गैर न थे ।।
अपनो के काले कारनामें
इतिहासो में छपने हैं।।
इसी लिये……..
राजकोट के छव मन्दिर
को तोड़ने वाले गैर न थे।
पृथ्वीराज चौहान की
आँखे फोड़ने वाले गैर न थे।
छत्रसाल प्रताप शिवा को
मोड़ने वाले गैर न थे।
बन्दा बैरागी को इकला
छोड़ने वाले गैर न थे।।
गुरू गोविन्द सिंह के लालो से
लालअनेको खफ्ने हैं।।
इसी लिये…….. ||
सात सौ साल यवनों की
हकूमत रखने वाले गैर न थे।
अंग्रेजों की सारी बुराइयें
ढकने वाले गैर न थे।।
वैदिक संस्कृति के विरूद्ध
कभी बकने वाले गैर न थे।
ऋषियों की बांधी मर्यादा
लखने वाले गैर न थे।।
यूँ ही रहा भारत में पाकिस्तान
अनेकों नपने हैं।।
इसी लिये………….
खान पान और भेष भाषा को
बिगाड़ने वाले अपने हैं।।
अपने शहरों और ग्रामों को
उजाड़ने वाले अपने हैं।।
खुद को मिटाने के लिए
सिंह से दहाड़ने वाले अपने हैं।
अनगिन जयचन्द भारत की
जड़ फाड़ने वाले अपने हैं।।
‘शोभाराम’ कोई पेश चले ना,
केवल तेरी कल्पने हैं।।
इसीलिए……..
उपदेश
रोज सवेरे शाम – प्रभु का नाम लिया करो
निश दिन आठों धाम प्रभु का नाम लिया करो
ईश्वर सत्यम् शिवम् सुन्दरम अजर अमर अभये
नित्य पूर्ण ब्रह्म है शान्ति का धाम प्रभु का ।। 1 ।।
मात वही गुरु तात वही है
मित्र वही है भ्रात वही है
उस ही से रिश्ते तमाम
प्रभु का नाम ।।2।।
दाग पाप धुल जायेंगे
द्वार ज्ञान के खुल जायेंगे
बिगड़े बनेंगे सारे काम
प्रभु का नाम ।।3।।
ओ३म नाम का जप जो कर गये
प्रेमी भव सागर से तर गये
मिला पूर्ण विश्राम प्रभु का नाम ।।4।।










