एक ऋषि आया था जग में

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एक ऋषि आया था जग में

एक ऋषि आया था जग में,
किया कल्याण उन्होंने आके,
दयानन्द था नाम उनका,
टंकारा था ग्राम उनका।
किया उत्थान उन्होंने आके ।।1।।

रग रग में भर रहा था स्वार्थ,
प्यारा भारत हुआ था गारत,
किया निर्माण उन्होंने आके ।।2।।

धर्म कर्म का ध्यान नहीं था,
हम हैं कौन कुछ ज्ञान नहीं था,
कराया ज्ञान उन्होंने आके ।।3।।

अनगिन बहनों और भाइयों के
मुख से मोहम्मदी ईसाइयों के,
बचाये प्राण उन्होंनें आके ।।4।।

पाखंडियों के पाखंडों से,
धूर्तों के बद हथकंडों से,
किया परित्राण उन्होंने आके ।।5।।

कहा ऋषि ने शूद्र और नारी,
विद्या पढ़ने के अधिकारी,
दिये प्रमाण उन्होंने आके ।।6।।

मूर्खता का जाल हटाया,
अंधियारे में आके उगाया,
वेद का भान उन्होंने आके ।।7।।

छुटी ठगों की हेरा फेरी,
आमदनी की दसवीं ढेरी,
बताई दान उन्होंने आके ।।8।।

ईश्वर जीव प्रकृति अनादि,
सृष्टि रचना ठीक बता दी,
दिये व्याख्यान उन्होंने आके ।।9।।

भरोसा था प्रेमी भगवान पर,
दुनिया में अपने दुश्मन पर,
किये अहसान उन्होंने आके ।।10।।