एक झोली में फूल भरे हैं

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एक झोली में फूल भरे हैं

एक झोली में फूल भरे हैं
एक झोली में कांटे रे
कोई कारण होगा।
तेरे बस में कुछ भी नहीं
ये ती बांटने वाला जाने रे
कोई कारण होगा।

सागर से भी बुझ सकती नहीं
कभी किसी की प्यास।
कभी एक ही बूंद से मिट
सकती है मन की आस…. ॥

पहले बनती हैं तकदीरें
फिर बनता है शरीर।
ये प्रभु की कारीगरी है
तूं क्यों है गम्भीर….॥

नाग भी डस ले तो मिल जाए
किसी को जीवनदान।
चींटी से भी मिट सकता है
किसी का नामोनिशान…. ॥

धन का बिस्तर मिल जाए
पर नींद को तरसें नैन।
कांटों पर सोकर भी आए
किसी के मन को चैन।