दुष्टों के काल का दीन दयाल का।

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सच्चे शिव का दीवाना

(तर्ज-न मैं भगवान् हूँ न मैं शैतान हूँ…)

दुष्टों के काल का दीन दयाल का।
मैं हूँ दीवाना सच्चे शिव का जगपाल का।

१. आँखों में छाई है। दिल में समाई है।
धुन सच्चे शिव की मेरे होंटों पे आई है।
लटका लगाता जाऊँ उसके ख़याल का।
मैं हूँ दीवाना सच्चे………

२. न ही वह दूर है न ही वह पास है।
फिर भी दीवाने दिल को मिलने की आस है।
ढूँढूँगा कोना कोना धरती पाताल का।
मैं हूँ दीवाना सच्चे……….

३. गाते हैं लोग जो उलटे वे गीत हैं।
कथनी और करनी इन की दोनों विपरीत हैं।
शिकवा न कोई मुझ को जग की इस चाल का।
मैं हूँ दीवाना सच्चे……

४. जीवन की राह में ईश्वर की याद है।
अपना बना ले मुझ को यह ही फ़रयाद है।
‘पथिक’ है मतलब यह ही मेरे इस हाल का।
मैं हूँ दीवाना सच्चे………..