दुनिया में तेरा हो बड़ा मान
दुनिया में तेरा हो बड़ा मान,
आज समय की कर पहचान।
पीड़ितो की पीड़ायें हरदे,
करदे तू नव निर्माण।।
अपने बल पौरूष से
नवयुवक बदल जमीं आसमान । टेक।
इन्सानों के बीच दरारे,
खड़ी हैं विषमता की दीवारें ।।
भूखी नंगी जनता रोकर,
कह रही आंसुओं से मुंह धोकर।
रोटी कपड़ा और मकान।
सबसे पहले चाहिये
हमको फिर चाहिये भगवान ।। 1 ।।
महलों में दिन में रातों में,
गवांये धनी धन उत्पातों में।
श्रमिक की टूटी झोंपड़ियां
दुबला तन सूखी अन्तड़ियाँ ।।
दिल के बुझे अरमान ।
पशुओं से बदतर हैं फिर
भी कहलायें इन्सान । ।2।
निठल्ले साधन सम्पन्त क्यों हैं।
मेहनत कश जन निर्धन क्यों है।।
कभी सोचा ना विचारा लगाकर
भाग्य वाद का नारा तैने किया
बड़ा नुकसान अज्ञान आभाव
अन्याय मिटादे, करो दुखों से त्राण…….
मोक्ष के ठेकदार अनेकों
फिरें पतित मक्कार अनेकों।
भोली जनता को बहकाकर रहें
अपना उल्लू सीद्या कर।।
उनसे तू हो सावधान,
आपत्ति से देश बचाले
शोभाराम नौजवान । । 4 ।।










