दुनिया को देख दुनिया, हैरत में आ रही है
दुनिया को देख दुनिया, हैरत में आ रही है,
शक्ति है कौन ये जो, चक्कर चला रही है (1)
भानु शशि सितारे, दिन रात घूमते हैं
किसकी महान् माया, इनको घुमा रही है (1)
ऊँचे पहाड़ देखो, हिम की चटान वाले (2)
गङ्गा से पूछा हमने, भागी क्यों जा रही है
भूमि को खोद कर के, देखा तो जल भरा है
भूमि में जलजलों में, भूमि समा रही है
बालक जो गर्भ में हो, माता से पूछ देखो
सच सच बता दे माता, तू क्या बना रही है
माता-पिता ही दोनों, इन्कार कर गये हैं
दोनों से न्यारि शक्ति, रचना रचा रही है
निशा में आकाश देखो, मालिक की वाटिका में
दीपक से जल रहे हैं, छवि कैसी छा रही है
जग को बनाने वाला, जग में ही रम रहा है
रचईता की शान “भीष्म”, रचना दिखा रही है
दुनिया को देख दुनिया, हैरत में आ रही है
शक्ति है कौन ये जो, रचना रचा रही है
रचना :- पूज्य श्री स्वामी भीष्म जी,
प्रसिद्ध क्रन्तिकारी भजनोपदेशक थे,
लगभग 85 वर्ष तक पूरे उत्तर भारत में
वैदिक सिद्धान्तों का प्रचार किया।
श्री स्वामी भीष्म जी महाराज
देश के स्वतन्त्रता आंदोलन के
क्रान्तिकारियो के अनन्य सहयोगी रहे ।
स्वामी श्रद्धानन्द जी के साथ मिलकर
शुद्धि सभा में काम किया |
स्वामी जी महाराज का 125 वर्ष की
आयु में शरीरांत हुआ।
शक्ति है कौन जो ये चक्कर चला रही है (1)
किसकी महान् माया, इनको घुमा रही है (1) :-
तुलना कीजिये यजुर्वेद 40वें
अध्याय के मन्त्र 5 से :-
तदे॑जति॒ तन्नैज॑ति॒ तद्दू॒॒रे तद्व॑न्ति॒के ।
तद॒न्तर॑स्य॒ सर्व॑स्य॒ तदु॒ सर्व॑स्यास्य बाह्य॒तः ।। ५ ।।
वह परमात्मा स्वयं गति नहीं करता
परन्तु सबको गति देता है,
विभु रूप से गतिमान् है पर एकदेशी
पदार्थ की तरह वह गति नहीं करता |
ऊँचे पहाड़ देखे, हिम की चटान वाले (2) :-
तुलना कीजिये ऋग्वेद मन्त्र 2/12/2
“पर्वतान् प्रकुपितान् अरम्णात्”
उस परमात्मा ने क्रुद्ध पहाड़ों को
रमणीय बना रखा है जिसने विस्तीर्ण
आकाश का निर्माण किया है,
जिसने सूर्य को थाम रखा है |










