दुनियाँ के मालिक ख़ालिक हमारे।
(तर्ज- तेरी जवानी तपता महीना)
- दुनियाँ के मालिक ख़ालिक हमारे। हम हैं तुम्हारे ।
हम बेसहारों को दे दो सहारे । हम हैं तुम्हारे ।
दुनियाँ के मालिक…..
१. तेरे सिवा जग में दीनों का बन्धु कोई नहीं है
तुम हो प्रभु हम को प्राणों से प्यारे। हम हैं तुम्हारे ।
दुनियाँ के मालिक…..
२. सुना है ज़माने में जिस पे तुम्हारी नज़रे करम हो
लगती है जा के वो कश्ती किनारे । हम हैं तुम्हारे ।
दुनियाँ के मालिक…..
३. जाएँ कहाँ पे हम सूझे न कोई दूजा ठिकाना
हम आ गए दाता अब तेरे द्वारे। हम हैं तुम्हारे ।
दुनियाँ के मालिक……
४. आशा है छोटी सी विनती हमारी प्रभु पूरी होगी
‘पथिक’ खड़े दर पे झोली पसारे। हम हैं तुम्हारे ।
दुनियाँ के मालिक……










