दुनिया जानेगी एक दिन मानेगी

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दुनिया जानेगी एक दिन मानेगी

दुनिया जानेगी, एक दिन मानेगी,
ऋषि दयानन्द की बातों को।
चुप नहीं रहना है, हमें तो कहना है,
पाखण्डियों के उत्पातों को ।।

चली हवायें, कोई लाख छुपाये,
असलियत छिप ना सके ।।
मुल्ला पोप पुजारी पण्डे,
ग्रंन्थी के चक्कर में।
दुनिया ऊब गई, समझ अब खूब गई,
इनके दाव पेंच और धातों को ।।1।।

पंथ सारे महन्त और सन्त सारे,
घूम रहे खतरे मे
अब तक भारी मजे उड़ाये,
अब नहीं दाल गलेगी।।
तर्क के तीरों से आर्य वीरों से,
कोई बचा न सके बदजातों कों। ।2।।

कुरान बाईबिल तौरेत जवूद इंजिल,
तलास बिल करने लगी।
बादल अन्दर अधिक देर तक
सूरज लुक न सकेगा।।
नहीं नजूमी हूँ नहीं ज्योतिषी हूँ,
मैं तो समझें सही हालातों को।।३।।

ऋषि कहते कि सत्यमेव जयते,
हम क्यों न विश्वास करें।
‘शोभाराम’ कहे सत्य सनातन
वैदिक धर्म की जय हो।।
तब सब समझेंगे, झूठी कह देंगे,
इन धूर्तों की करामातों को।।4।।