दु:ख दूरित ईश्वर हरता
दु:ख दूरित ईश्वर हरता
सर्वविध पालन करता
परमपिता है सन्सार का
दु:ख दूरित ईश्वर हरता
सर्वविध पालन करता
परमपिता है सन्सार का
ईश कर्म को तोले
खातों को फिर खोले
पाप ही दु:ख का कारण
तपी करे सुख धारण
कुन्दन केवल तप से चमकता
तप साधन है हमारा
जिसने जाना मर्म कर्म का
उसने जीवन तारा
दु:ख दूरित ईश्वर हरता
सर्वविध पालन करता
परमपिता है सन्सार का
दूरियाँ नजदीकियाँ
?? प्रभु से होये
फल वैसा वह पाये
जैसा बीज कर्म का बोये
पापी का जब पाप लौट के
आए तो वह रोए
चैन ना पाए दिन भर
ना वो रात रात भर सोए
छुपती ना पाप की चोरी
इससे तो महँगी कौड़ी
पापी का धन तो खाए कुटुम्ब
लगे पाप तो पापी को
बड़ा दिन है वह पापी
जिसे जीवन व्यर्थ है करना
रो रो के आया जीवन में
रो रो के फिर मरना
दु:ख दूरित ईश्वर हरता
सर्वविध पालन करता
परमपिता है सन्सार का
पाप तो पहले छोटा लगता
पर वह विस्तृत होये
दूर-दूर नभ तक वह फैले
निज प्रतिष्ठा खोये
मित्र अनेकों होंवें
फिर भी ना अभीष्ट को पाए
कर ले पीर पैगम्बर साधु
सन्त गुरु ही चाहे
कर्ता ही कर्म फल पाये
किए पाप ही उसे सताए
ना तोड़ नियम
चल पुण्य के सङ्ग
मनमीत बना प्रभु को
शरण में आया पापी जाने
पाप से तौबा करना
स्तवन प्रभु का करके चाहे
इस जीवन से तरना
दु:ख दूरित ईश्वर हरता
सर्वविध पालन करता
परमपिता है सन्सार का
ईश कर्म को तोले
खातों को फिर खोले
पाप ही दु:ख का है कारण
तपी करे सुख धारण
कुन्दन केवल तप से चमकता
तप साधन है हमारा
जिसने जाना मर्म कर्म का
उसने जीवन तारा
दु:ख दूरित ईश्वर हरता
सर्वविध पालन करता
परमपिता है सन्सार का










