दूर-दूर से आये यात्रीगंगा तट के मेले में कुछ ले
दूर-दूर से आये यात्री
गंगा तट के मेले में, कुछ ले
जांगें, कुछ खो जांगे
भूले भटके मेले में।। टेक ।।
तरह-तरह की लेके भावना
सब मेला देखण आये,
कुछ तो पाप लेण आये,
कुछ पापों को फेंकण आये,
कुछ गंगा में नहा धोकर,
हर जगह माथा टेकण आये,
सद् उपदेश सुणन आये,
कुछ आंखों को सेकण आये,
सज्जन धन्यवाद लेजाँ,
दुर्जन जां कटके मेले में।।1।
तन को शुद्ध करन की खातर,
गंगा के जल में न्हाओ,
मन को शुद्ध करन की
खातर सतसंग मंडल में न्हाओं,
जीवन शुद्ध करन की खातर
दान पुन्य फल में न्हाओं
बेड़ागर्क करन की खातर पाप
की दलदल में न्हाओं बुरे
भले जैसे चाहो बस लेलो
लटके मेले में।।2।।।
दो दिन का जोबन मेले पै,
फिर यह फीका पड़ जागा,
रंग रैली अटखेली थैली
का सब जोश लिकड़ जागा
, मैला कुचेला होके मैला
बुरी तरह से सड़ जागा
आज जो रोनक देख रहे
कल को सब रंग बिगड़ जागा,
सजग सुभग पग पग पर
खतरा है खटपट के मेले में।।3।।
जिसको मेला कहते हो मिल
लो दो दिन का मेल है ये,
बिछड़े बाद फिर नहीं मिलेंगे
ऐसा अनोखा खेल है ये,
आने जाने वालों की सदियों
से धक्का पेल है ये,
बहुतों के लिये मोक्ष द्वार है,
बहुतों के लिये जेल है ये,
शोभाराम प्रेमी भी फंस
गया इस खटपट के मेले में।।4।










