दो सखी लगी आपस में कहन

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दो सखी लगी आपस में कहन

दो सखी लगी आपस में कहन,
आज देश हमारे की बहन,
यह दूर बुराई कौन करे।।टेक ।।

रिश्वत चोरी भ्रष्टाचार,
बढ़ते जा रहे रोग हजार,
इनकी दवाई कौन करे ।।1।।

ब्लैक की तो हद हो ली,
डाके पड़ते दिन धौली,
बन्द लुटाई कौन करे।।2।।

गुन्डे आगे बढ़े हुए,
सज्जन गण पीछे पड़े हुए,
मगर सुनाई कौन करे।।3।।

लुच्चों के तो सौ साथी,
भलों को गाली दी जाती,
इस तरह भलाई कौन करे।।4।।

सरकार से पूछा जाता,
वहां से उत्तर आता है,
बेकार लड़ाई कौन करे ।।5।।

प्रेमी की कोई नहीं सुनता,
जो सुनता वह नहीं गुणता,
अब मगज घसाई कौन करे।।6।।