दियौ भारत गर्द मिलाय फूट ऐसी हरे

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दियौ भारत गर्द मिलाय फूट ऐसी हरे

दियौ भारत गर्द मिलाय
फूट ऐसी हरे-२
फूट
ऐसी घर में भई।
इसी फूट ने लंकेश्वर का
कर दिया सत्यानाश,
रावण कुम्भकरण से
योद्धा रण में भये विनाश,
विभीषण लंक लई ।। दियौ० ।।१

कौरव और पाण्डव से
योद्धा भये जगत् विख्यात्,
उनकी लोथि पड़ी रही
रण में पक्षी उड़ि-२ खात्,
फली विष वेल नई।। दियौ० ।।२

राजा पृथ्वीराज और
जयचन्द भारत सरताज,
इन दोउन में फूट पड़ी
तब हिन्दुन को गयौ राज,
जीत गौरी की भई।। दियौ० ।।३

सर्वोपरि भारत रहा धन
में यह इतिहास बताई,
अब निर्धन और कंगाल
रह गये शेष रही न पाई,
गरीबी घोर छई।। दियौ० ।।४

इसी पापिनी ने भारत को
कर दीना मुहताज,
स्वार्थ और मूर्खता
फली बिगड़ गये सब काज,
दशा ऐसी बिगड़ गई।। दियौ० ।।५

है आखिर में यही प्रार्थना
सुनि लीजे धरि ध्यान,
इस दुष्टा को दूर भगाओ
तभी होय कल्याण,
बात बनि है जब ही ।। दियौ० ।।६