दिन सारे गवाये जीवन के
स्वर :- दिन सारा गुजारा तेरे अंगना
दिन सारे गवाये जीवन के,
बचपन के यौवन के मेरे यार
अब तो जाग हो मेरे यार
अब तो जाग दुर्जन की
राहजन की संगत में आ
गया तू किचड़ में धसके
कहता जन्नत में आ गया
हूं दे छोड शराब की प्याली
फस रोती है तेरी घर वाली
हो मेरे यार……
ईर्ष्या ने नफरत ने
पागल बना दिया है।
गुलशन ये प्यार का
अरे हाथों जला दिया है।
कहां मिलेगी तुझको छाया
नही प्रेम का पेड लगाया
हो मेरे यार…..
जो करनी सोई भरनी कमों
की सबको मिलती बोया है
बीज जैसा वैसी ही बेल
फलती खुद को मत रहना
छलते खोटे सिक्के नही चलते
ये वैभव ये दौलत रखले तू
जितनी गिन गिन
हो मेरे यार…..
कोई ना साथ देगी तेरी
बिदाई के दिन दो हाथ कफन
के अन्दरजाना है तुझे सुरेन्द्र
हो मेरे यार….










