दिल में लगी है, आज ये मेरे लगाके समाधि

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दिल में लगी है, आज ये मेरे लगाके समाधि

तर्ज – चाहूंगा मैं तुम्हें……

दिल में लगी है, आज ये मेरे लगाके समाधि,
शाम सवेरे तेरा नाम मैं जपूँगा
सुबह शाम मैं जपूँगा दिल में…….

क्या लिखेगा, ओ ‘सचिन’,
ना है जहाँ ये, तेरे बिन भगवन……
तेरा नाम भजूँ मैं बार-बार,
सुखधाम मैं जपूँगा सुबह शाम मैं जपूँगा…….

हे प्रभु, तू है पिता,
वेद की है, ये ही सदा भगवन……
तेरा नाम भजूँ मैं बार-बार,
सुखधाम मैं जपूँगा सुबह शाम मैं जपूँगा……

ये फिज़ा, ये समां, दे रहे है,
तेरा पता भगवन……
तेरा नाम भजूँ मैं बार-बार,
सुखधाम मैं जपूँगा सुबह शाम मैं जपूँगा……

ना है कोई, आज मेरा,
जीवन में है, मेरे अंधेरा भगवन……
तेरा नाम भजूँ मैं बार-बार,
सुखधाम मैं जपूँगा सुबह शाम मैं जपूँगा…….