दिल में बुरे विचार आप क्यों भर बैठे।(धुन-ना ना करते प्यार तुम्ही)
दिल में बुरे विचार
आप क्यों भर बैठे।
नैया है मझधार,
बिना पतवार,
आप जिस पर बैठे। । टेक।
अनेकों शुभ कर्मों से
नर तन यह पाया।
विषयों में अनमोल
जीवन गंवाया।।
यह भयंकर भूल शूल
को फूल समझ सुन्दर बैठे ।।1।।
प्रकृति सत् है और
जीव सत् चित्त है।
सत् चित्त आनन्द प्रभु
में तेरा हित है।।
आप आग पैट्रोल,
बारूद पै गोल बना
बिस्तर बैठे।।2।।
आज ही बुराइयों
को मन से हटा लो।
शेष जो रहा है जीवन
उसे ही सम्भालों ।।
‘प्रेमी’ शोभाराम,
शुरू शुभ काम करो,
क्यों डर बैठे।।3।।










