दिल को टटोल मेरी सुन करके

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दिल को टटोल मेरी सुन करके

दिल को टटोल मेरी सुन करके,
सुन करके कुछ गुन करके।
दाग यदि दिल पर नहीं,
तो फिर तुझको कोई डर नहीं।।

मन और वचन कर्म में यदि है
भेद इस घाटे के जीवन पर कर खेद।

कुछ ध्यान दे, कही मान ले,
कुछ जान ले, पहचान ले।
अन्तर अन्दर बाहर नहीं,
तो फिर तुझको कोई डर नहीं।।।।।

कुछ करने, कुछ भरने का प्रोग्राम,
लेकर आये हैं यहाँ जीव तमाम।

कुकर्म तज, शुभ कर्म कर,
चल धर्म पर कुछ शर्म कर।
जीवन में आडम्बर नहीं,
तो फिर तुझको कोई डर नहीं।।2।।

और को धोखा देने वाले जाग,
स्वयं ही धोखा खा रहा क्यों निर्माग।

दलदल है दल-दल से निकल,
प्रेमी संभल, सुपथ पै चल।
रुष्ट यदि ईश्वर नहीं तो फिर
तुझको कोई डर नहीं। ।3।।