ध्यान हटा के ईधर उधर से
तर्ज – पण्डित जी मेरे मरने के बाद….
ध्यान हटा के ईधर उधर से,
बस इतना कष्ट उठा लेना।
जो है नाथ पिता परमेश्वर,
उसको शीश झुका देना।
कहाँ भटकता फिरता है तू,
हर पल तेरे पास में है- (2)
है सचिन ‘सारंग’ वो दिल में,
दिल का साज़ सज़ा देना
ध्यान हटा के……….
काले बादल सूरज चन्दा,
परमेश्वर की रचना हैं-(2)
उस ईश्वर की अपने दिल में,
भक्ति ज्योत जला देना
ध्यान हटा के…….
झूठे है ये रिश्ते नाते,
वो प्रभु ही सच्चा है-(2)
उस दाता की शरण में जाके,
दूर अंधेर भगा देना
ध्यान हटा के……..
वन-उपवन में वो ना मिलेगा,
ना है वो बाजारों में-(2)
घर बैठे ही मिल जायेगा,
बनके भक्त दिखा देना
ध्यान हटा के……….










