ढूंढ़नें से मेहरबाँ वो ना मिला ना मिला
तर्ज – कल चमन था आज ये……
ढूंढ़नें से मेहरबाँ वो
ना मिला ना मिला
उसका कहीं भी
आशियाँ ढूंढ़ने से मेहरबाँ…….
याद रखना वेद वाणी को ‘सचिन’,
वो प्रभु हर एक कण-कण में रमा,
ढूढनें से मेहरबाँ वो ना मिला।
ना मिला मुझको…..
ठोकरें खाता फिरा मैं दर-बदर,
ना मिला मुझको कहीं उसका मकां,
ढूंढ़नें से मेहरबाँ वो ना मिला।
ना मिला……..
मंदिरों और मस्ज़िदों में मैं गया,
पर वहां पर भी मिला वो लापता,
ढूंढ़ने से मेहरबाँ वो ना मिला।
ना मिला……
हार कर ऋग्वेद फिर मैंने पढ़ा,
वो प्रभु फिर मिल गया दिल में छुपा,
ढूंढनें से मेहरबाँ वो ना मिला।
ना मिला……










