ढूँढते हैं हम वे लोग, पाते हैं जिनसे बोध
ढूँढते हैं हम वे लोग
पाते हैं जिनसे बोध
खोज रहे हैं हम उनको
पाना है ज्ञान-ओज
सानिध्य उनका हमसे
सार्थक कर दे
हे पवमान प्रभु ! धन्य हमें कर दे
शरण देवों की करती है पावन
बरसाती है जो ज्ञान का सावन
देते दिखाई उन्हें ज्ञान के पिपासु
करते अपात्रों का भी वह तर्पण
शुभ सत्यता की भावना से भर दे
हे पवमान प्रभु ! धन्य हमें कर दे
देवगणों को क्या तुम जानते हो
दिव्य गुणों की क्या पहचानते हो
उनके अन्त:करण विनीत विशुद्ध हैं
ज्ञान कर्म से प्रमित प्रबुद्ध हैं
इनकी छाप का अमिट असर दे
हे पवमान प्रभु ! धन्य हमें कर दे
देव है ये आध्यात्मिक दानी
ना कुछ लेते हैं, वो हैं निष्कामी
कर्मेन्द्रियाँ सब इनकी पवित्र हैं
सब अपना मित्र मानते हैं
पदार्थ गुणों की झोली वो भरते
हे पवमान प्रभु ! धन्य हमें कर दे
श्रेयस-मार्ग में अग्रसर रहते
बुद्धि ज्ञान प्रभूत करते
कर्म आचरण मानवता के
आत्मसात कर प्रतिरूप करते
बुद्धि ज्ञान क्रतुओं में विचरते
हे पवमान प्रभु ! धन्य हमें कर दे
प्राणियों को हम भी स्वसम देखें
दु:ख पीड़ा कष्टों को हर लें
ईर्ष्या-द्वेष-घृणा निन्दा-मद
दुर्व्यवहार दुरित ना सीचें
छल छिद्र कपट से सदा दूर कर दे
हे पवमान प्रभु ! धन्य हमें कर दे
हे प्रभु! श्रद्धा विनय के प्रार्थी
हर पल सङ्ग रहो – बन के साथी
ज्ञान विवेक से जागृत कर दे
अन्त:-बाह्य की शुद्धि कर दे
भाव अराति सर्वथा तू हर ले
हे पवमान प्रभु !! धन्य हमें कर दे
ढूँढते हैं हम वे लोग
पाते हैं जिनसे बोध
खोज रहे हैं हम उनको
पाना है ज्ञान-ओज
सानिध्य उनका हमसे
सार्थक कर दे
हे पवमान प्रभु ! धन्य हमें कर दे
धन्य हमें कर दे
धन्य हमें कर दे










