धरती की शान तू है

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धरती की शान तू है

धरती की शान तू है
मनु की संतान,
तेरी मुट्ठियों में बन्द
तूफान है रे।

मनुष्य तू बड़ा महान है
भूल मत,
मनुष्य तू बड़ा
महान है।।

तू जो चाहे दुर्गम
पहाड़ों को फोड़ दे,
तू जो चाहे नदियों की
धारा को मोड़ दे।

तू जो चाहे माटी से
अमृत निचोड़ दे,
तू जो चाहे धरती को
अम्बर से जोड़ दे।।
अमर तेरे प्राण……..

अमर तेरे प्राण मिला
तुझको वरदान,
तेरी आत्मा में स्वयं
भगवान है रे।
मनुष्य तू………

नयनों में ज्वाल तेरी
गति में भूचाल,
तेरी छाती में छिपा
महाकाल है।

पृथ्वी के लाल तेरा
हिमगिरिया भाल,
तेरे कदमों में तांडव
का ताल है।
निज को तू जान….

निज को तू जान जरा
शक्ति पहचान,
तेरी वाणी में युग का
आहवान है रे।
मनुष्य तू……..।२।।

धरती का धीर तू है
अग्नि सा वीर,
तू जो चाहे काल
को भी थाम ले।

पापों का प्रलय रूके
पशुता का शीश झुके,
तू जो अगर हिम्मत
से काम ले।

गुरु सा मतिमान,
गुरु सा मतिमान,
पवन सा गतिमान,
तेरी नभ से भी ऊंची
उड़ान है रे।
मनुष्य तू ……….।।३।।