धर्मरक्षा में जो वीर मर जायेंगे

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धर्मरक्षा में जो वीर मर जायेंगे

धर्मरक्षा में जो वीर मर जायेंगे-
नाम दुनिया में अपना वो कर जायेंगे।

आप मानें न मानें, खुशी आपकी
हम मुसाफिर हैं कल अपने घर जायेंगे।

ये न पूछो कि मरकर किधर जायेंगे-
वह जिधर भेज देगा उधर जायेंगे।

धर्मप्रचार करने में इक दो नहीं
देख लेना हजारों के सिर जायेंगे।

आप दिखला रहे हैं किसे तुर्सियां
ये नशे वह नहीं जो उतर जायेंगे।

टूट जाए न माला कहीं प्रेम की-
यह है अनमोल मोती बिखर जायेंगे।

लो अछूतों को अब तो मिला हिन्दुओ-
वरना ये लाल गैरों के घर जायेंगे।

वेद की शुद्ध शिक्षा को दो प्रेम से
लोग बिगड़े हुए भी सुधर जायेंगे।