धर्म नहीं बदला, गुरु तेग बहादुर सिर कलम करवा गए।
धर्म नहीं बदला, गुरु तेग बहादुर सिर कलम करवा गए।
धर्म नहीं बदला, मतिदास बाबा आरे से धड़ चिरवा गए।
तुम कैसे सनातनी हो, तलवार देखकर धमकी से डर गए?
धर्म नहीं बदला, अजीत-जुझार से लाखों युद्ध में मर गए।
धर्म नहीं बदला, फतेह-जोरावर जिंदा दीवार में चुन गए।
तुम कैसे सनातनी हो, तलवार देखकर धमकी से डर गए?
धर्म नहीं बदला, दयाला बाबा खौलते पानी में गिर गए।
धर्म नहीं बदला, बन्दा बैरागी चिमटे से मांस लुचवा गए।
तुम कैसे सनातनी हो, तलवार देखकर धमकी से डर गए?
लेखक मुनीम सिंह कुशवाहा ग्राम बिनवारा जिला निवाड़ी मध्य प्रदेश – 9584283313
वीरों के हृदय में एक पवित्र गुनगुनाहट सी होती रहती है। प्रत्येक समय पर पीड़ा- हरण तथा परस्वत्व-रक्षण की पुण्य भावना उनके हृदय-कलश में एक गुंजार सी पैदा किए रहती है। जैसे चांद की शीतल किरणों से संसार की खेतियां एक उत्पादक रस प्राप्त करती हैं। ऐसे ही क्षत्रियों की वीरता से, मरी हुई जातियां नया जीवन -लाभ करती हैं। कुम्भलाई हुई संस्कृतियां, फिर से लहलहा उठती है।
क्षत्रिय अपने देश, अपनी भाषा, अपनी संस्कृति का परवाना है। उस पर जान दे देगा पर उसकी आन पर बट्टा न लगने देगा। इतना ही नहीं, वह संस्कृति मात्र का परवाना है।
🎧882वां वैदिक भजन🕉️👏🏽










