देव दयानन्द तेरे अहसान हम।
देव दयानन्द तेरे अहसान हम।
उतारेंगे कैसे लेकर कितने जन्म ॥
जल रही थी आग में ‘बेमोल’ देवियां।
भर रही थी आसुओं को पी के सिसकियाँ।
हो रहे थे ठौर-ठौर जुल्मों सितम…..
लुट रहे थे कौम के वो लाल बच गये।
फूल से सलौने नौनिहाल बच गये।
आज सारे विश्व पर है आपका करम…..
चारों ओर छाया हुआ अन्धकार था।
पापियों पाखण्डियों का पापाचार था।
ज्ञान का उजाला देकर मिटाया भरम…..
पशुओं को डालते थे यज्ञ हवन में।
दुर्गन्धि फैलाते पोप शुद्ध पवन में।
बताया करें थे पापी इसको धरम…..










