देव चराचर के उत्पादक सब दुःख दुर्गुण दूर हटा दो।
(तर्ज – साधक बन कर करो साधना अमृत का भण्डार मिलेगा)
१. देव चराचर के उत्पादक
सब दुःख दुर्गुण दूर हटा दो।
जो गुण कर्म स्वभाव सुखद हैं
हम सब को उपलब्ध करा दो।
देव चराचर के उत्पादक……….
२. जो पदार्थ उत्पन्न हुए हैं
उन सब के तुम ही मालिक हो
सुख स्वरूप त्रिभुवन के धाता
भक्तिभाव उर में उपजा दो।
देव चराचर के उत्पादक………..
३. तुम हो आत्मिक बल के दाता
सब विद्वान् प्रशंसा करते
प्रभु तव आश्रय ही अमृत है
मृत्यु शोक से मुक्ति दिला दो।
देव चराचर के उत्पादक…………
४. जड़ चेतन सम्पूर्ण जगत् के
एक मात्र तुम ही राजा हो
पशु पक्षी नर वश में तेरे कर
करुणा कर्त्तव्य सिखा दो।
देव चराचर के उत्पादक………
५. रवि शशि पृथ्वी लोक बनाकर
अन्तरिक्ष में भ्रमण करावे
कृपा दृष्टि कर स्नेह वृष्टि से
तप्त हृदय की प्यास बुझा दो।
देव चराचर के उत्पादक…….
६. तुम हो नाथ प्रजा के स्वामी
तुझ बिन कोई और न दूजा करो
कामनाएँ सब पूरी धन देकर
धनवान बना दो।
देव चराचर के उत्पादक…..
७. मात पिता बन्धु तुम सब के नाम
स्थान जन्मों के ज्ञाता
जिस में विचरें सभी देव जन
हमें वही आनन्द मिला दो।
देव चराचर के उत्पादक……
८. हे प्रकाशमय ज्ञान के दाता धन
वैभव हित हमें बढाओ
श्रेष्ठ मार्ग के ‘पथिक’ बनाकर
पाप कर्म सब के छुड़वा दो।
देव चराचर के उत्पादक……










