देखकर रंग तेरी दुनियाँ का

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देखकर रंग तेरी दुनियाँ का

तर्ज- याद में तेरी जाग-जाग…..

देखकर रंग तेरी दुनियाँ का,
हम तो हैरान होते जाते हैं।
भर के निश में उड़ान पंछी भी,
तेरी महिमा के गीत गाते हैं।।

सारी सृष्टि को तू चलाता है
तू ही सबके दिलों को भाता है
तेरी कविता कवि सचिन ‘सारंग’
अपने मुख से मधुर सुनाते है
देखकर रेग तेरी………

कैसे संसार ये रचाया है
मेरी कुछ ना समझ में आया है
ऊँचे पर्वत, शशि, नदी, नीरद,
तेरी कारीगरी समझाते हैं
देखकर रेग तेरी……….

कहीं झरनों की होती है
झर-झर कहीं चलती सबायें है
फर-फर कहीं नामो-निशां
ना वर्षा का कहीं घन वृष्टि
को बरसाते हैं देखकर रेग तेरी……