देखी अजब निराली महिमा सत्संग की।
देखी अजब निराली
महिमा सत्संग की।
सत्संग अन्दर मोती हीरे,
मिलते लेकिन धीरे-धीरे।
जिसने खोज निकाली,
महिमा सत्संग की।।१।।
सत्संग सच्चा तीर्थ है भाई,
करते हैं जो नेक कमाई।
धर्महीन रहेंगे खाली,
महिमा सत्संग की।।२।।
सत्संग अन्दर प्रेम बढ़ाओ,
समय न अपना व्यर्थ गवांओ।
देखो पीट जाए ना ताली,
महिमा सत्संग की।।३।।
सत्संग में तुम जाना सीखो,
सबसे प्रेम बढ़ाना सीखो।
सत्संग बिन सब खाली,
महिमा सत्संग की।।४।।










