दयानन्द ने जगाया सारी दुनियां को
दयानन्द ने जगाया
सारी दुनियां को ,
इक्क रस्ता दिखाया
सारी दुनियां को ,
रहे थे सो उठा गया
वोह सारी दुनियां को ,
दिये जहर किसी ने पत्थर मारे,
नहीं झुके ऋषि ना हारे।
सच्चाई को सुना गया
वो सारी दुनियां को।।
बन बैठे थे ईश्वर जो घर-घर ,
ललकारा ऋषि ने उनको जाकर।
पाखंडों से बचा गया
वोह सारी दुनियां का।।
नारी शुद्र वेद नहीं पढते थे ,
पोप पाखंडों से सारे लोग डरते थे।
वेदों को पढा गया
वोह सारी दुनियां का।।
भाई-भाई लड़े हम गुलाम हुये ,
सुनो लोगो ऋषि ने वचन कह।
मिलकर रहो सिखा गया
वोह सारी दुनियां का।।
जाते जाते ऋषि ने
इक्क काम किया ,
लेखराम गुरूदत्त
श्रद्धानन्द दे दिया।
अमृत को पिला गया
वोह सारी दुनियां का।।










