दयानन्द के वीर सैनिक बनेंगे
दयानन्द के वीर सैनिक बनेंगे,
दयानन्द का काम पूरा करेंगे।
कहेगा जगत् फिर से इक स्वर में सारा,
वही वृद्ध भारत गुरु है हमारा।
उठाये ध्वजा धर्म की हम फिरेंगे,
इसी के लिए हम जीयेंगे मरेंगे।
गुंजायेंगे वेदों को हम गीत गाकर,
दिखायेंगे दुनिया को उत्तम बनाकर।
उठायेंगे ऋषियों की आवाज को हम,
बनायेंगे फिर स्वर्ग संसार को हम।
मिटायेंगे हम सम्प्रदायों के मत को,
बनायेंगे फिर आर्य सारे जगत् को।
वही प्रेम-गंगा यहाँ फिर बहेगी,
जो संसार की ताप-माला हरेगी।










