दयामय ज्योति मन-मन्दिर दया कर जगमगा जाओ

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दयामय ज्योति मन-मन्दिर दया कर जगमगा जाओ

दयामय ज्योति मन-मन्दिर
दया कर जगमगा जाओ
अन्धेरे की परेशानी
निराश को हटा जाओ

अरे जुगनू निरालंकार
टिम टिम कर सुझा इसको
नहीं मार्ग कहीं लखता
मुझे ध्रुव पार ले जाओ

पुजारी भक्ति पुष्पों से
रिझाता गन्ध द्रव्यों से
विनय मेरी सुनो भगवन्
तरसता अब लखा जाओ

नहीं लाना मुझे तुमको
पिता शरणों पड़ा तेरे
सत्वों के प्रेम में गुथ के
खिलो दीपक जगा जाओ

दयामय ज्योति मन-मन्दिर
दया कर जगमगा जाओ
अन्धेरे की परेशानी
निराश को हटा जाओ