दया करो तो अभी से कर दो

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दया करो तो अभी से कर दो

दया करो तो अभी से कर दो
हे नाथ! फिर कब दया करोगे।
सुनाई होगी न क्या हमारी पुकार
यूं ही सुना करोगे ॥ १ ॥
दया करो…….

दया तुम्हारी जो गर न होती
तो नाथ मेरी गुजर न होती
खताएं मेरी बेशक हैं लाखों क्षमा भी
हे नाथ तुम्ही करोगे ॥ २ ॥

भंवर में मेरी फंसी है तैया
सहारा कब से तकें खिवैया।
करो किनारे पे जल्दी आके,
हुई जो देरी तो क्या करोगे ॥ ३॥

दया के सागर कहाते हो तुम
सुना है दुःख से छुड़ाते हो तुम
क्या सबसे ज्यादा हैं गुनाह हैं मेरे
जो नाथ तुम न क्षमा करोगे ॥४॥

हजारों पापी हैं तुमने तारे
अधम निशाचर सभी उभारे
क्या मैं ही पापी हूं सब से
भारी जो नाथ तुम न क्षमा करोगे ॥५॥
दया करो……….

कर्म किये जो बुरे-भले, इनका दुःख-सुख फल।
भोगे से प्रारब्ध है, मिले आज या कल ।