दौलत ढलती छाया
दौलत ढलती छाया।
जीवन का उद्देश्य नहीं
ये क्यों इस पर इतराया।
दौलत से ऐनक मिलती
पर नैन कहाँ से आए।
दौलत औरत दे सकती
पर पत्नी कहाँ से पाए।
औषध मिलती दौलत से
पर मिल सकती ना सेहत।
दौलत से बादाम खरीदा पर
मिलती ना ताकत……
दौलत भोजन दे सकती
पर भूख नहीं दे पाये।
दौलत बिस्तर दे सकती
पर नींद कहाँ से लाये।
दौलत लड़का दे सकती पर
पुत्र दिलाना मुश्किल है।
दौलत नौकर दे सकती पर
सेवक पाना मुश्किल है……
पुस्तक मिलती दौलत से
पर ज्ञान नहीं मिल सकता।
मिले मूर्ति दौलत से
भगवान् नहीं मिल सकता।
चित्र खरीदो दौलत से
पर नहीं चरित्र मिलेगा।
साथी मिल सकता दौलत से
पर ना मित्र मिलेगा…..
साधन मिल सकते
दौलत से मिलती नहीं साधना।
भोग मिलेंगे दौलत से
मिल सकती नहीं भावना।
शोहरत मिलती दौलत से
पर मिल सकती ना इब्बत।
दौलत से हथियार मिलेंगे
मिल सकती ना हिम्मत…..










