दाता कहीं न आपसा सारे जहान में
दाता कहीं न आपसा
सारे जहान में
पाताल में नहीं, न कहीं
आसमान में
दाता कहीं न आपसा
सारे जहान में
तेरा न रङ्ग रूप कोई
न शरीर है
परिचय सदा मिला तो मिला
बेनिशान में
पाताल में नहीं, न कहीं
आसमान में
दाता कहीं न आपसा
सारे जहान में
कहते हैं सब समीप तुझे
फिर भी दूर है
कैसी विडम्बना है तेरे
आन बान में
पाताल में नहीं, न कहीं
आसमान में
दाता कहीं न आपसा
सारे जहान में
सारी उमर तलाश किया
भटके दर-बदर
दर्शन अगर हुए तो हुए
योग ध्यान में
पाताल में नहीं, न कहीं
आसमान में
दाता कहीं न आपसा
सारे जहान में
दुनिया में हो अमीर कोई
या गरीब हो
हर एक बैठता है तेरे
इम्तहान में
पाताल में नहीं, न कहीं
आसमान में
दाता कहीं न आपसा
सारे जहान में
इस दिल में एक आप रहें
एक मैं रहूँ
पर तीसरा न आये कोई
दरम्यान में
पाताल में नहीं, न कहीं
आसमान में
दाता कहीं न आपसा
सारे जहान में
महिमा है बेशुमार तेरी
गुण अपार हैं
गिन ले “पथिक” मजाल है
इसकी जबान में
पाताल में नहीं, न कहीं
आसमान में
दाता कहीं न आपसा
सारे जहान में
दाता कहीं न आपसा
सारे जहान में
पाताल में नहीं, न कहीं
आसमान में
दाता कहीं न आपसा
सारे जहान में










