- जो मनुष्य जगत् का जिनता उपकार करेगा, उसको उतना ही ईश्वर ही व्यवस्था से सुख प्राप्त होगा।
2. अपने जीवन का ध्येय निश्चित कीजिए। बिना उद्देश्य दिन-रात व्यस्त रहना और परिश्रम करना कहाँ की बुद्धिमानी है।
- अपना जीवन इतना सरल तथा सादा बनाओ कि कम से कम साधनों से काम चल जावे,
4. क्योंकि सादगी आत्मस्वतंत्रता की कुंजी है। जीओ तो ऐसे जीओ कि लोग आपको देखने को लालायित हो और मरने के बाद वर्तमान शरीर से अच्छा शरीर मिले तथा लोग कहें कि एक सच्चा ईमानदार व्यक्ति चला गया।
5. जो व्यवहार अपनी आत्मा को अच्छा नहीं लगता हो, उसको दूसरों के साथ मत करो।
6. किया हुआ कर्म कभी निष्फल नहीं होता, चाहे वह शुभ हो या अशुभ ।
7. जो पुरुषार्थी नहीं है वहीं संसार में दुःखी तथा असफल है।
8. धन की तीन गतिः दान, भोग और नाश है जो न दान करता है और न भोग करता है, उसका धन नाश को प्राप्त होता है।
9. धन और ज्ञान में एक महान अन्तर है कि धन की रक्षा हमें करनी पड़ती है, परन्तु ज्ञान हमारी रक्षा करता है।
- ईश्वर की स्तुति, प्रार्थना व उपासना से जीव का बल इतना बढ़ जाता है कि पर्वत के समान दुःख आने पर भी घबराता नहीं है और सबको सहन कर लेता है क्या यह छोटी बात हैं?
- सब मंगल कार्यों में अपने और पराये कल्याण के लिए यज्ञ द्वारा ईश्वरोपासना करें।
यज्ञ कार्यक्रम सुबह : 8 बजे से वीरवार 31 अक्टूबर, 2024 को दादा मालदेव पार्क, दरियापुर कला, दिल्ली में होगी।
समारोह स्थल : दादा मालदेव मन्दिर, दरियापुर कलां, दिल्ली-39
आयोजक : आर्य महासंघ के तत्वावधान में आर्य समाज दरियापुर कलां, दिल्ली-39 जय आर्य जय आर्यावर्त
चलभाष सं: 9999645546, 8700770452, 8851614984










