दर्द दिल के दर्द में कोई रो रहा तकदीर को

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दर्द दिल के दर्द में कोई रो रहा तकदीर को

दर्द दिल के दर्द में कोई
रो रहा तकदीर को
काई रांझा बन खर्क मैं
ढूंढता है हीर को।।टेक ।।

अफसोस कैसे जीवित जब
दिल के हुये टुकड़े हजार
किश्ती वाली को बुलाने का
मर्ज किसी वीर को ।।1।।

कामनी कौशल सुरैया
की खड़ा कोई याद में
कर रहा है याद कोई
लखमी झण्डू मीर को।।2।।

कोई सुल्फा भंग में,
कोई मस्त मदिरा पान में
कर रहे बरबाद जीवन,
खो रहे हैं शरीर को ।।3।।

हाल क्या है देश का
प्रेमी पता कुछ भी
नहीं दर्द खोना वतन का,
सोचा नहीं तदवीर को ।।4।।