दफ्तर साथ ना देगा

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दफ्तर साथ ना देगा

दफ्तर साथ ना देगा,
ना घर ही साथ देगा।
अंतिम समय में तुमको,
ईश्वर ही साथ देगा।।

ओरों की आंखे फोड़ी,
माया अपार जोड़ी,
तिरने चला समन्दर,
पत्थर की लेके घोड़ी।
दुखिया दिलों का दिल में
आदर ही साथ देगा ।। 1 ।।

रूप ये सजीला,
तेरा बदन यह गठीला,
दुख का बनेगा कारण
हर जोड़ होके ढीला।
एक आत्मा का ऊँचा
अस्तर ही साथ देगा।।2।।

कर्म सारे संचित,
अंतः करण पै अंकित,
फल अवश्यमेव देंगे,
नहीं कर्म फल से वंचित।
शुभ कर्म जो तुम्हारा,
समय पर ही साथ देगा।।3।

दुनिया को रिझाया,
ईश्वर का गुण ना गाया,
तैने शोभाराम प्रेमी,
धन धर्म ना कमाया।
प्रभु भक्ति में सना जो
वह स्वर ही साथ देगा।। 4